मैं अपको एक चीज से अवगत कराना चाहता हुँ
जिंदगी हम सब जीते हे लेकिन किसी ने यह सोचा की जिंदगी मे बहुत उतार चाढ़ाओ जरुर आते हे में यह बात समाज की कर रहा हु लेकिन में समाज से हट कर वहाँ चलता हूं जिसे समाज गन्दा बोलता है ओर गलत नजर से देखता है वह जगह जहां हर शाम को दुल्हन की तरह सजती है उसको समाज कहता है वेश्या जो वेश्यालय में रहती है किसी ने यह जनने की कोशिश की के कैसे जीती है अपनी जिंदगी
दोस्तो आज में आपको उनकी जिंदगी के कुछ पल अवगत करना चाहता हु
वेश्या एक कोठे में अपनी जिंदगी जीती है लेकिन उसका दर्द कितना होता है जब मैने जाना तो आँखों से आंसू टपक पड़े दुनिया मे हर एक इंसान अपने पेट पालने के लिए कुछ न कुछ तो जरूर करता है चाहे वह रोड़ पर ठेला लगता हो या फिर वह भीख माँगता हो लेकिन एक औरत की कोई मजबूरी होती तो जब वह समाज मे मजदूरी करती है फिर भी उस औरत का इस्तेमाल किया जाता है
चाहे वह बड़ी कम्पनी हो या फिर मजदूरी हो लेकिन औरत को इज़्ज़त से काम नही मिलता
लीहजा वह मजबूर होकर वेश्या बन जाती है और एक वेश्यालय में रहने लगती है मेने एक वेश्या से बात की उसका नाम अनिता है उसने कहा में समाज मे एक गांव में खेती बाड़ी में काम करती थी खेती बाड़ी का जो मालिक था वह मेरे पर गलत नजर डालता था और एक दिन यह कहा में जो कहुगा वह तुम को करना पड़ेगा वरना में तुमको काम से निकाल दूंगा वह औरत मजबुरी में अपनी इज़्ज़त गांवा देती है अनिता ने कहाँ समाज मे जब ऐसा है तो मैने सोचा कि वेशयले चली आ आई यहा तो मेरी इज़्ज़त तो होगी और दो के चार पैसे मिलेंगे इस वजह से अनिता वेशयले में आ गयी अनिता जैसे यहाँ पर बहुत औरते मिल जायेगी ।
हमारा समाज इनको अपनाता नही है लेकिन समाज के कई घर इनके पेसो के पलते है जैसे कि इतिहास गवाह है वीरान जगह पर वेशयले बना वह जगह आबाद हो गई एक फ़िल्म है मंडी उस फिल्म में यही दिखाया गया है जगह को आबाद करती है
दिल्ली का रेड लाइट एरिया जी बी रोड जहा पर वेश्याएं रहती है खबर के लिए वहां गया तो मैने देखा की समाज इनको धुत्कारता है लेकिन समाज के कई पेट पलते है इनसे ।
एक वेश्या की जिंदगी बहुत दर्द भरी है
समाज मे कोई इंसान मर जाये तो कंधा देने दुश्मन भी आजाते है लेकिन एक वेश्या मर जाए तो कन्धा तो दूर की बात है उसको न तो कब्रस्तान न शमशान घाट पर दो गंज जमीन नही मिलती है
इंसान तो दूसरों पर आरोप लगाता तो है लेकिन अपने गिरवान में झांककर कभी देखा है कि मेरे अंदर कितने गुनाह किये है दुसरो पर आरोप लगाने में हिचकता तक नही है
अगर मेरे से कोई गलती हुई है तो माफी चाहता हूं
आपका अपना शहज़ाद अहमद
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